पत्थर को शीशे की निगेहबानी मिल गई,,,
आग को और जलाने वाली पानी मिल गई,,
किसने बांध बनाया होगा पानी के ऊपर,,
टूटा बांध तो दरिया को रवानी मिल गई,
जीवन का हर सफ कोरा था अफसानों के बिन,,
ज़ख्म लगा जब कातिब को कहानी मिल गई,,,
(प्रेम तपस्वी)
प्रेम तपस्वी की बिल्कुल ओरिजिनल ग़ज़लें , नज़्म,शायरी प्रेम वियोग दर्द टूटे दिल के लिए ,दिल छू लेने वाली ताज़ी और मूल रचनाएं
पत्थर को शीशे की निगेहबानी मिल गई,,,
आग को और जलाने वाली पानी मिल गई,,
किसने बांध बनाया होगा पानी के ऊपर,,
टूटा बांध तो दरिया को रवानी मिल गई,
जीवन का हर सफ कोरा था अफसानों के बिन,,
ज़ख्म लगा जब कातिब को कहानी मिल गई,,,
(प्रेम तपस्वी)
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