ख्वाब की ज़ुस्तज़ु में सवेरा न मिला,, परिंदे हिजरत से लौटे तो बसेरा न मिला,,, (प्रेम तपस्वी)
प्रेम तपस्वी की बिल्कुल ओरिजिनल ग़ज़लें , नज़्म,शायरी प्रेम वियोग दर्द टूटे दिल के लिए ,दिल छू लेने वाली ताज़ी और मूल रचनाएं
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