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मई, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शीशे की निगेहबानी

 पत्थर को शीशे की निगेहबानी मिल गई,,, आग को और जलाने वाली पानी मिल गई,, किसने बांध बनाया होगा पानी के ऊपर,, टूटा बांध तो दरिया को रवानी मिल गई, जीवन का हर सफ कोरा था अफसानों के बिन,, ज़ख्म लगा जब कातिब को कहानी मिल गई,,, (प्रेम तपस्वी)

वादे उल्फत (नज़्म)

 वादे उल्फत के लिए जिंदगी खराब किए, हमने दिलबर के लिए खून को गुलाब किए,,, तुमको शोहरत तो मिले मुझको यूं तबाह करके,,, इक कहानी की तरह ज़िस्त को किताब किए मेरी आंखों के लिए हर ,,,नशा तुम्हारा है,,, हर तसव्वुर तेरी सूरत का हम शराब किए,,,, चाहें बैठे हैं खुदा की तरहा तुम्हे जानम,,, इश्कहो या सजदा हमने दोनों बेहिसाब किए,,, (प्रेम तपस्वी)